“तलवे चाटना” एक लोकप्रिय हिंदी मुहावरा है, जिसका प्रयोग ऐसे लोगों के लिए किया जाता है जो अपने स्वार्थ के लिए किसी की अत्यधिक चापलूसी या खुशामद करते हैं। आज के समय में यह विषय सोशल मीडिया, दोस्ती, राजनीति, दफ्तर और रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर चर्चा का हिस्सा बन जाता है। इसी वजह से इस विषय पर लिखी गई शायरियां लोगों को अपनी भावनाएं व्यंग्यात्मक और प्रभावशाली अंदाज में व्यक्त करने का अवसर देती हैं।
अगर आप तलवे चाटने पर शायरी खोज रहे हैं, तो इस लेख में आपको स्वार्थी लोगों, चमचागिरी करने वालों और झूठी तारीफ करने वालों पर बेहतरीन शायरियां पढ़ने को मिलेंगी। इन शायरियों को आप WhatsApp, Facebook, Instagram या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्टेटस, कैप्शन या पोस्ट के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
हमने यहां ऐसी शायरियां शामिल की हैं जो व्यंग्य, आत्मसम्मान और सच्चाई का संदेश देती हैं। उम्मीद है कि आपको अपनी भावना व्यक्त करने के लिए यहां मनपसंद शायरी अवश्य मिलेगी।
तलवे चाटने पर शायरी

तलवे चाटकर जो खुद को बड़ा बताते हैं,
वक्त आने पर वही सबसे पहले नजरें चुराते हैं।
जिसकी फितरत में चापलूसी बस जाती है,
उसकी अपनी पहचान कहीं खो जाती है।

तलवे चाटने वालों की भीड़ बहुत मिलेगी,
पर सच बोलने वालों की कीमत अलग होगी।
हम झुकना जानते हैं सिर्फ अपने उसूलों के लिए,
किसी के तलवे चाटना हमारी फितरत नहीं।

चापलूसी से मिली शोहरत ज्यादा दिन नहीं टिकती,
इज्जत हमेशा किरदार से बनती है।
जो हर बात पर हां में हां मिलाते हैं,
वही लोग अक्सर तलवे चाटते नजर आते हैं।

तलवे चाटकर मुकाम पाने वालों,
याद रखना मेहनत की बराबरी कभी नहीं कर पाओगे।
हमारी पहचान हमारे शब्द हैं,
किसी की चापलूसी नहीं।
जो खुद्दारी बेच देते हैं फायदे के लिए,
वो तलवे चाटकर भी सुकून नहीं पाते।
झूठी तारीफों से रिश्ता निभाने वाले,
अक्सर अपने वजूद से हार जाते हैं।
इज्जत कमानी पड़ती है जनाब,
तलवे चाटने से सिर्फ एहसान मिलते हैं।
जो लोग मतलब के लिए झुक जाते हैं,
वही लोग हर दर पर तलवे चाटते नजर आते हैं।
हमने सीखा है सिर ऊंचा रखकर जीना,
तलवे चाटकर जीना हमारी आदत नहीं।
चापलूसी करने वाले हर महफिल में मिल जाएंगे,
लेकिन स्वाभिमान वाले लोग गिने-चुने होते हैं।
तलवे चाटने से अगर सफलता मिल भी जाए,
तो ऐसी जीत से बेहतर अपनी मेहनत की हार है।
तलवे चाटकर जो खुद को शेर बताते हैं,
असल में वो दूसरों के इशारों पर चलते हैं।
औकात अपनी मेहनत से बनाओ,
तलवे चाटकर नहीं, किरदार दिखाकर दिखाओ।
जिसे हर किसी की हां में हां मिलानी पड़े,
समझ लो उसकी अपनी कोई पहचान नहीं।
हम झुकते हैं सिर्फ रिश्तों की खातिर,
किसी के तलवे चाटना हमारी आदत नहीं।
जो हर वक्त चापलूसी में लगे रहते हैं,
वो कभी दिलों में जगह नहीं बना पाते।
तलवे चाटने से तख्त तो मिल सकता है,
लेकिन इज्जत कभी नहीं मिलती।
स्वाभिमान बेचकर जो मुस्कुराते हैं,
वो अंदर ही अंदर खुद से हार जाते हैं।
सच कड़वा जरूर होता है,
इसलिए चापलूसों को कभी पसंद नहीं आता।
जो खुद की बात नहीं रख सकता,
वो दूसरों के तलवे ही चाटता है।
मेहनत करने वाला सिर उठाकर चलता है,
चापलूस हमेशा नजरें झुकाकर चलता है।
तलवे चाटने वालों की पहचान यही है,
हर बदलते वक्त के साथ उनका मालिक बदल जाता है।
हमारी फितरत में खुशामद नहीं,
जो हैं, वही सामने हैं।
चापलूसी से मिला सम्मान,
हवा के झोंके जैसा होता है।
जो हर किसी के आगे झुक जाए,
वो कभी खुद की नजरों में ऊंचा नहीं उठ पाता।
हमने अपना रास्ता खुद बनाया है,
किसी के तलवे चाटकर मंजिल नहीं पाई।
जिस दिन स्वाभिमान बिक गया,
उस दिन इंसान सिर्फ नाम का रह गया।
तलवे चाटने वाले अक्सर ऊंची बातें करते हैं,
लेकिन उनका वजूद दूसरों की मेहरबानी पर टिका होता है।
हमें झूठी तारीफ नहीं आती,
इसलिए हम चापलूसों की भीड़ में नहीं आते।
जिसे अपनी काबिलियत पर भरोसा होता है,
उसे किसी के तलवे चाटने की जरूरत नहीं पड़ती।
हम इज्जत कमाने निकले हैं,
तलवे चाटकर एहसान लेने नहीं।
निष्कर्ष
उम्मीद है कि इस लेख में दी गई तलवे चाटने पर शायरी आपको पसंद आई होगी। ये शायरियां केवल व्यंग्य के माध्यम से स्वाभिमान, सच्चाई और आत्मसम्मान का संदेश देने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। यदि आपको यह संग्रह अच्छा लगा हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें और अपनी पसंदीदा शायरी कमेंट के माध्यम से हमें भी बताएं।