125+ पुराने घर पर शायरी – बचपन और पुरानी यादों को याद करने वाली शायरी

पुराना घर सिर्फ ईंट, पत्थर और दीवारों से बना हुआ मकान नहीं होता, बल्कि उसमें हमारी जिंदगी के अनगिनत खूबसूरत पल और यादें बसी होती हैं। उसी घर के आंगन में बचपन बीता होता है, उन्हीं दीवारों के बीच परिवार के साथ हंसी-मजाक हुआ होता है और वहीं से जिंदगी की कई यादें जुड़ी होती हैं। इसलिए जब हम अपने पुराने घर को याद करते हैं तो दिल में एक अलग ही एहसास पैदा होता है।

पुराने घर पर शायरी उन यादों को शब्दों में बयां करने का खूबसूरत माध्यम है, जिन्हें वक्त गुजरने के बाद भी भुलाया नहीं जा सकता। पुराने घर की चौखट, आंगन, कमरे और दीवारें आज भी बचपन की कहानी सुनाती हुई महसूस होती हैं। अगर आपको भी अपना पुराना घर और उससे जुड़ी यादें याद आती हैं, तो ये शायरियां आपके दिल को जरूर छू जाएंगी।

पुराने घर पर शायरी

पुरानी दीवारों में आज भी वो बात है,
जहां बीते बचपन की हर याद खास है।

वो पुराना घर आज भी याद आता है,
जहां हर कोना बचपन की कहानी सुनाता है।

उस पुराने घर की मिट्टी में कुछ खास था,
वहां हर दिन जैसे खुशियों का एहसास था।

घर पुराना हो गया, यादें पुरानी नहीं हुईं,
वक्त बदल गया, मगर बातें पुरानी नहीं हुईं।

अब वो आंगन भी सूना-सूना लगता है,
जहां कभी हमारा बचपन खेला करता था।

पुराने घर की चौखट पर जब नजर जाती है,
बचपन की हर तस्वीर आंखों में उतर आती है।

कुछ घर सिर्फ घर नहीं होते,
वो हमारी जिंदगी के सबसे खूबसूरत किस्से होते हैं।

वो घर भले ही आज पुराना हो गया,
मगर मेरे दिल में हमेशा नया रहा।

आज भी दिल वहीं ठहर जाता है,
जब पुराने घर का ख्याल आता है।

ईंटों से बना था वो छोटा सा घर,
लेकिन उसमें बसती थी दुनिया हमारी।

पुराने घर की यादों पर शायरी

पुराने घर की याद जब भी आती है,
आंखों के सामने बचपन की तस्वीर आ जाती है।

वो कमरा, वो आंगन और वो दरवाजा,
आज भी याद आता है बचपन का हर अंदाजा।

वक्त गुजर गया, लोग बदल गए,
मगर पुराने घर के किस्से आज भी वही हैं।

पुराने घर की हर दीवार पहचानती थी हमें,
हमारे बचपन के हर राज जानती थी।

जहां कभी दोस्तों के साथ खेला करते थे,
आज उसी घर को याद करके अकेले मुस्कुराते हैं।

पुराने घर की खुशबू आज भी दिल में है,
बचपन की हर खुशी आज भी यादों में है।

घर से दूर हुए तो समझ आया,
पुराना घर कितना अपना था।

वो छोटी सी छत, वो खुला आसमान,
पुराने घर में ही था हमारा सारा जहान।

पुराने घर की तस्वीर संभालकर रखी है,
उसमें हमने अपनी पूरी जिंदगी रखी है।

यादों का घर कभी टूटता नहीं,
पुराना घर दिल से कभी छूटता नहीं।

पुराने घर की याद शायरी 2 Line

पुराना घर आज भी दिल के करीब है,
वहीं तो मेरा बचपन सबसे खुशनसीब है।

दीवारें पुरानी हैं मगर यादें नई लगती हैं,
पुराने घर की बातें आज भी अपनी लगती हैं।

वो घर छूट गया तो क्या हुआ,
उसकी यादें आज भी मेरे साथ हैं।

पुराने घर की मिट्टी से रिश्ता आज भी है,
बचपन से जुड़ा हर किस्सा खास आज भी है।

घर बदल गए, शहर बदल गए,
मगर बचपन के रास्ते नहीं बदले।

पुराने घर का आंगन याद आता है,
जहां परिवार का हर चेहरा नजर आता है।

वो पुराना घर मेरी पहचान था,
उसकी हर दीवार मेरा अरमान था।

कितना सुकून था उस पुराने घर में,
आज भी दिल भटकता है उसी शहर में।

वक्त ने घर को भले बदल दिया,
यादों ने उसे आज भी वैसा ही रखा है।

पुराने घर से दूर होकर जाना,
अपने बचपन से दूर होने जैसा है।

पुराने घर और बचपन पर शायरी

जिस आंगन में बचपन बीता था,
आज वही आंगन यादों में मिलता है।

वो बचपन भी कितना प्यारा था,
पुराना घर ही हमारा पूरा संसार था।

न कोई चिंता थी, न कोई फिक्र थी,
पुराने घर में बस बचपन की खुशी थी।

पुराने घर की छत पर बैठकर,
हम सपनों का पूरा आसमान देखा करते थे।

वो दीवारें आज भी याद हैं,
जहां बचपन की शरारतों के निशान थे।

बचपन लौटकर तो नहीं आएगा,
मगर पुराना घर हमेशा याद आएगा।

पुराने घर के आंगन में जो खुशी थी,
वो बड़े होकर कहीं और नहीं मिली।

वो कच्चे रास्ते, वो पुराना मकान,
वहीं बसा था हमारा बचपन महान।

बचपन की सबसे प्यारी निशानी है वो घर,
जहां बीता था जिंदगी का पहला सफर।

आज सब कुछ है जिंदगी में,
बस पुराने घर वाला बचपन नहीं है।

पुश्तैनी घर पर शायरी

पुश्तैनी घर सिर्फ मकान नहीं होता,
उसमें कई पीढ़ियों का सम्मान होता है।

पुरानी दीवारों में बुजुर्गों की यादें हैं,
इस घर में हमारे परिवार की बातें हैं।

पुश्तैनी घर की मिट्टी से अलग ही प्यार है,
उसकी हर ईंट में अपनों का संसार है।

वक्त बदलता रहा, पीढ़ियां गुजरती रहीं,
मगर पुश्तैनी घर की यादें हमेशा जिंदा रहीं।

जिस घर में दादा की आवाज गूंजती थी,
आज भी उसकी खामोशी बहुत कुछ कहती है।

पुराना घर हमारी जड़ों की निशानी है,
इससे जुड़ी हर याद बहुत पुरानी है।

जिस आंगन में परिवार साथ बैठा करता था,
वही आंगन आज भी दिल में बसा करता है।

पुश्तैनी घर की कीमत धन से नहीं होती,
उसकी कीमत तो उसमें बसी यादों से होती है।

घर पुराना जरूर है, मगर प्यार नया है,
हर कोने में अपनों का साया है।

अपनी जड़ों से जोड़े रखता है पुराना घर,
याद दिलाता है हमें अपना बीता हुआ सफर।

पुराने घर को छोड़ने पर शायरी

घर छोड़ना आसान नहीं होता,
क्योंकि घर के साथ बचपन भी पीछे छूट जाता है।

जब पुराना घर छोड़ा था हमने,
जैसे अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आए थे।

नई जगह ने सब कुछ तो दिया,
मगर पुराने घर जैसा सुकून नहीं दिया।

पुराने घर की चौखट से जब विदा हुए,
आंखों में कितने ही बचपन के किस्से थे।

घर बदल गया, जिंदगी बदल गई,
बस पुरानी यादों की दुनिया नहीं बदली।

कुछ जगहें छोड़ तो देते हैं हम,
मगर दिल से कभी छोड़ नहीं पाते।

पुराना घर पीछे छूट गया,
मगर उसकी यादों का रास्ता आज भी खुला है।

नई दीवारों में रहने लगे हैं अब,
मगर दिल आज भी पुराने घर में रहता है।

वो घर छूटा तो एहसास हुआ,
यादें भी इंसान को कितना करीब रखती हैं।

पुराने घर से दूर होकर समझ आया,
अपना घर आखिर अपना ही होता है।

निष्कर्ष

पुराने घर पर शायरी सिर्फ पुराने मकान की बात नहीं करती, बल्कि उन यादों और रिश्तों को भी याद करती है जो उस घर से जुड़े होते हैं। बचपन की शरारतें, परिवार के साथ बिताए पल, आंगन की रौनक और पुरानी दीवारों की यादें समय बीतने के बाद भी हमारे दिल में हमेशा जिंदा रहती हैं।

उम्मीद है कि आपको पुराने घर की याद शायरी का यह संग्रह पसंद आया होगा। इन शायरियों को आप WhatsApp Status, Facebook और Instagram पर शेयर करके अपने पुराने घर और बचपन की खूबसूरत यादों को शब्द दे सकते हैं।

Leave a Comment