दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो भरोसे, अपनापन और सच्चाई से बनता है। लेकिन जब कोई दोस्त सिर्फ अपने मतलब के लिए साथ रहे और जरूरत खत्म होते ही दूर हो जाए, तो उस रिश्ते का दर्द अलग ही होता है। मतलबी दोस्त शायरी ऐसे ही नकली और स्वार्थी दोस्तों की सच्चाई को शब्दों में बयां करती है।
कभी-कभी जिंदगी में ऐसे लोग मिल जाते हैं जिन्हें हम अपना सच्चा दोस्त समझ लेते हैं, लेकिन समय आने पर उनका असली चेहरा सामने आ जाता है। ऐसी ही भावनाओं को व्यक्त करने के लिए नीचे मतलबी दोस्त शायरी का खूबसूरत संग्रह दिया गया है।
मतलबी दोस्त शायरी

मतलब के लिए जो दोस्त पास आते हैं,
काम निकलते ही वही दूर चले जाते हैं।
दोस्ती में हमने दिल से रिश्ता निभाया,
उसने हर बार अपना मतलब ही दिखाया।

चेहरे पर मुस्कान और दिल में हिसाब रखते हैं,
कुछ दोस्त भी अजीब किताब रखते हैं।
मुसीबत में जो साथ छोड़ जाए,
उसे दोस्त कहना भी दिल को दुखाए।

हमने दोस्ती को जिंदगी समझ लिया,
उसने दोस्ती को सिर्फ जरूरत समझ लिया।
मतलबी लोगों की दोस्ती भी कमाल होती है,
जरूरत पड़ने पर ही याद आती है।

सच्चे दोस्त कम और मतलबी ज्यादा मिले,
जिन्हें अपना समझा वही सबसे ज्यादा बदले।
दोस्ती के नाम पर सौदा करने लगे लोग,
मतलब खत्म हुआ तो पहचानने से भी इनकार करने लगे लोग।
हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता,
हर दोस्त दिल से सच्चा नहीं होता।
मतलबी दोस्त से बेहतर अकेलापन है,
कम से कम वहां किसी के बदलने का गम नहीं है।
Shayari Matlabi Dost

वक्त बदला तो दोस्ती के रंग बदल गए,
जो कल अपने थे आज अजनबी बन गए।
मतलबी दोस्ती का भी अजीब फसाना है,
काम हो तो अपना, वरना अनजाना है।
दोस्ती का नाम लेकर दिल से खेलते रहे,
अपने मतलब के लिए हमें इस्तेमाल करते रहे।
कुछ दोस्त सिर्फ तस्वीरों में अच्छे लगते हैं,
मुसीबत में अक्सर वही सबसे पहले भागते हैं।
जिसे अपना समझकर हर राज बताया,
उसी ने वक्त आने पर हमें ही पराया बताया।
मतलब की दुनिया में रिश्ते भी बाजार हो गए,
काम निकलते ही दोस्त बेकार हो गए।
दोस्ती सच्ची हो तो वक्त नहीं देखा जाता,
मतलबी हो तो मौका देखा जाता है।
हमने दोस्ती में कभी हिसाब नहीं रखा,
उन्होंने हर रिश्ते का हिसाब रखा।
कुछ दोस्त मौसम की तरह बदल जाते हैं,
काम पड़े तो आते हैं, काम खत्म हो तो चले जाते हैं।
अब हर किसी को दोस्त नहीं बनाते,
पहले लोगों के मतलब पहचानते हैं।
Matlabi Dost Shayari 2 Line

मतलब की दोस्ती ज्यादा दिन नहीं चलती,
सच्चाई की पहचान वक्त आने पर होती है।
काम था तो दोस्ती याद आई,
काम निकला तो हमारी याद भी चली गई।
मतलबी दोस्त की पहचान यही है,
जरूरत में अपना और बाद में पराया है।
दोस्ती का रिश्ता दिल से निभाया था,
उसने तो इसे मतलब से सजाया था।
वक्त ने सबकी औकात दिखा दी,
कौन अपना है, कौन मतलबी ये बात समझा दी।
जो हर वक्त मतलब से पास आते हैं,
वो दोस्त नहीं, बस अपना काम करवाते हैं।
दोस्ती में धोखा भी कमाल का मिला,
जिसे अपना माना वही मतलबी निकला।
सच्चे दोस्त किस्मत से मिलते हैं,
मतलबी दोस्त तो हर मोड़ पर मिलते हैं।
मतलब खत्म तो दोस्ती खत्म,
ऐसे रिश्तों से तो दूरी ही बेहतर है।
हमने रिश्ता समझा, उसने जरूरत समझी,
बस यहीं हमारी दोस्ती अधूरी रह गई।
Selfish Friend Matlabi Dost Shayari

जो अपने फायदे के लिए रिश्ते बदलते हैं,
ऐसे दोस्त वक्त के साथ खुद ही संभलते हैं।
Selfish दोस्त कभी अपना नहीं होता,
उसका हर रिश्ता किसी मतलब का होता है।
चेहरे पर दोस्ती और दिल में स्वार्थ था,
तभी तो हर रिश्ता उसके लिए व्यापार था।
जिसे दोस्ती में सिर्फ फायदा नजर आए,
उससे दूरी बनाना ही बेहतर कहलाए।
मतलबी दोस्त का साथ ज्यादा देर नहीं रहता,
क्योंकि उसका रिश्ता दिल से नहीं मतलब से रहता।
हमने दोस्ती में सब कुछ वार दिया,
उसने अपने मतलब के आगे हमें हार दिया।
स्वार्थी दोस्त की दोस्ती से अच्छा है अकेले रहना,
कम से कम किसी के बदलने का दर्द तो नहीं सहना।
कुछ दोस्त सिर्फ नाम के दोस्त होते हैं,
जरूरत पड़ते ही अपने काम के दोस्त होते हैं।
दोस्ती में स्वार्थ आ जाए तो रिश्ता टूट जाता है,
दिल सच्चा हो तो इंसान बहुत कुछ लुटाता है।
मतलबी दोस्त चाहे कितने खास क्यों न हों,
वक्त आने पर उनके चेहरे साफ दिख जाते हैं।
Matlab Ki Dosti Shayari

मतलब की दोस्ती में अपनापन कहां होता है,
जहां फायदा खत्म हो वहीं रिश्ता खत्म होता है।
मतलब की दोस्ती का बस इतना सा हिसाब है,
काम हो तो दोस्त, वरना हर कोई लाजवाब है।
जिस दोस्ती में हर बात का मतलब निकले,
वह रिश्ता दिल से नहीं, जरूरत से निकले।
मतलब के रिश्ते ज्यादा दिन नहीं चलते,
सच्चे लोग हर हाल में साथ चलते।
दोस्ती का नाम लेकर मतलब साधते रहे,
हम उन्हें अपना समझकर दिल लगाते रहे।
मतलब की दोस्ती में वफा कहां मिलती है,
जरूरत खत्म होते ही दूरी बढ़ती है।
रिश्ते दिल से बनते तो बात कुछ और होती,
मतलब से बनी दोस्ती तो बस एक मजबूरी होती।
हमने हर मुश्किल में दोस्ती निभाई,
उन्होंने सिर्फ अपने मतलब की दुनिया बनाई।
मतलब के लिए दोस्त बनाना छोड़ दिया,
अब सच्चे लोगों को पहचानना सीख लिया।
जो दोस्ती में भी अपना फायदा देखते हैं,
वो अक्सर रिश्तों की कीमत खो देते हैं।
अब हर किसी पर भरोसा नहीं करते,
क्योंकि कुछ दोस्त भी धोखा देते हैं।
जिसे दोस्ती का मतलब समझाया था,
उसी ने मतलब की दोस्ती सिखा दी।
दोस्ती के पीछे छिपा मतलब समझ आ गया,
वक्त बदला तो असली चेहरा सामने आ गया।
हमने जिसे अपना समझकर दिल में जगह दी,
उसने जरूरत के हिसाब से अपनी जगह बदल ली।
सच्ची दोस्ती की तलाश आज भी है,
मतलबी दोस्तों से दूरी आज भी है।
निष्कर्ष
मतलबी दोस्त शायरी सिर्फ नाराजगी या शिकायत का नाम नहीं है, बल्कि यह उन अनुभवों को शब्द देती है जो हमें रिश्तों की सच्चाई समझाते हैं। हर मुस्कुराने वाला इंसान सच्चा दोस्त नहीं होता और हर दूर रहने वाला इंसान बुरा नहीं होता। इसलिए दोस्ती हमेशा सोच-समझकर और भरोसे के साथ निभानी चाहिए।
अगर किसी दोस्त ने आपका भरोसा तोड़ा है, तो उस अनुभव से सीख लेना बेहतर है। जिंदगी में कम दोस्त हों लेकिन सच्चे हों, तो वही सबसे बड़ी दौलत है।