125+ बचपन की पुरानी यादें शायरी | Bachpan Shayari in Hindi

बचपन जिंदगी का वह खूबसूरत दौर होता है, जिसे इंसान उम्र बढ़ने के बाद भी कभी नहीं भूल पाता। बचपन की पुरानी यादें शायरी उन्हीं प्यारे लम्हों को शब्दों में बयां करने का एक खूबसूरत जरिया है। दोस्तों के साथ खेलना, बिना किसी चिंता के घूमना और छोटी-छोटी बातों पर खुश हो जाना आज भी दिल को सुकून देता है।

बचपन की गलियों, स्कूल के दिनों, दोस्तों की शरारतों और परिवार के साथ बिताए पलों की यादें मन में हमेशा ताजा रहती हैं। समय भले ही आगे बढ़ जाए, लेकिन बचपन की मासूमियत और उन दिनों की खुशियां दिल के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहती हैं। अगर आप भी अपने बचपन को याद करते हैं, तो ये खूबसूरत शायरियां आपके एहसास को जरूर शब्द देंगी।

बचपन की पुरानी यादें शायरी

वो बचपन के दिन भी कितने सुहाने थे,
जेब खाली थी फिर भी दिल के खजाने थे।

न कोई चिंता थी, न कोई फिक्र थी,
बचपन की हर सुबह खुशियों से भरी थी।

छोटी-सी खुशी पर चेहरे खिल जाते थे,
बचपन में हम हर पल मुस्कुराते थे।

वो कागज की नाव और बारिश का पानी,
बचपन की यादें हैं सबसे प्यारी कहानी।

न दौलत की चाह थी, न शोहरत का जुनून,
बचपन में छोटी खुशियों से मिलता था सुकून।

वो स्कूल की घंटी और दोस्तों का साथ,
आज भी याद आते हैं बचपन के वो दिन-रात।

खिलौनों में दुनिया और सपनों में उड़ान थी,
बचपन की हर बात ही कितनी आसान थी।

वो गलियों में दौड़ना और देर तक खेलना,
आज भी दिल चाहता है फिर से बचपन जीना।

बीत गया बचपन मगर यादें रह गईं,
वो प्यारी सी खुशियां दिल में रह गईं।

वक्त ने हमसे बचपन छीन लिया,
मगर उसकी यादों ने दिल को हसीन कर दिया।

आज भी मुस्कुरा देते हैं बचपन को याद करके,
वो दिन ही अलग थे दुनिया से बेखबर रहकर।

Bachpan Shayari 2 Line

काश कुछ पल फिर बचपन में लौट जाएं,
पुराने दोस्तों संग फिर वही खेल खेल आएं।

वो बचपन था या खुशियों का खजाना,
हर दिन लगता था जैसे कोई नया अफसाना।

बचपन के दिन लौटकर कभी नहीं आते,
मगर उनकी यादें हमेशा दिल को हंसाती हैं।

बचपन की वो शरारतें याद आती हैं,
जब छोटी-छोटी बातें बड़ी खुशियां देती थीं।

वो दिन कितने अच्छे थे जब दिल साफ था,
हर चेहरा अपना और हर रिश्ता खास था।

बचपन की तस्वीरें जब सामने आती हैं,
बीती हुई खुशियां फिर से याद आती हैं।

न मोबाइल था, न इंटरनेट का जमाना था,
फिर भी दोस्तों के साथ हर पल सुहाना था।

बचपन में हर सपना सच्चा लगता था,
हर अपना दिल के बहुत करीब लगता था।

वो खेल, वो मस्ती और दोस्तों का प्यार,
बचपन के दिन थे जिंदगी का सबसे खूबसूरत त्योहार।

काश कुछ पल फिर बचपन में लौट जाएं,
पुराने दोस्तों संग फिर वही खेल खेल आएं।

बचपन की यादों का भी अलग ही नशा है,
याद करो तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

वो बचपन के दिन थे बड़े कमाल के,
न सवाल जिंदगी के, न जवाब दुनिया के।

बचपन की मासूमियत शायरी

चेहरे पर मुस्कान और दिल में सच्चाई थी,
बचपन में हर बात में एक मासूमियत समाई थी।

न किसी से मतलब, न कोई चालाकी थी,
बचपन की दुनिया कितनी भोली-भाली थी।

हर अजनबी को अपना समझ लेते थे,
बचपन में हम रिश्ते दिल से निभाते थे।

छोटी-सी बात पर खुश हो जाना,
यही तो था बचपन का मुस्कुराना।

दिल में न नफरत थी, न कोई सवाल,
बचपन की मासूमियत थी सबसे बेमिसाल।

आंखों में सपने और दिल में प्यार था,
बचपन का हर रिश्ता बेहद शानदार था।

वो भोली सी बातें आज भी याद हैं,
बचपन की मासूमियत के वो पल बेहद खास हैं।

न दुनिया की समझ थी, न मतलब की पहचान,
बचपन में हर इंसान लगता था महान।

मासूम सी हंसी और प्यारी सी शरारत,
बचपन की यही थी सबसे सुंदर इबादत।

बचपन की मासूमियत अब कहां मिलती है,
वो बेफिक्र हंसी अब कहां मिलती है।

जिस उम्र में खिलौने सबसे प्यारे थे,
उसी उम्र में हम खुद सबसे न्यारे थे।

बचपन की मासूम आंखों में सपने हजार थे,
छोटी सी दुनिया में हम खुद ही राजा थे।

बचपन की दोस्ती शायरी

वो बचपन के दोस्त भी क्या खूब थे,
जेब खाली थी मगर दिल के बहुत अमीर थे।

साथ खेलना और साथ ही रूठ जाना,
बचपन की दोस्ती का यही था अफसाना।

न कोई मतलब था, न कोई हिसाब,
बचपन की दोस्ती थी बस दिल का जवाब।

वो स्कूल के दोस्त और शरारतों की बात,
आज भी याद आती है उनकी हर बात।

एक टिफिन में मिलकर खाना खाते थे,
बचपन में दोस्ती के रिश्ते निभाते थे।

वो गलियों में साथ खेलना याद आता है,
पुराना दोस्त आज भी दिल के करीब आता है।

न उम्र की फिक्र थी, न दुनिया का डर,
दोस्तों के साथ खुश रहते थे हर पहर।

बचपन की दोस्ती बड़ी अनमोल थी,
हर दोस्ती में सच्चाई और दिल की बात थी।

लड़ते भी थे और अगले पल हंसते थे,
बचपन में दोस्ती के रंग बड़े सच्चे थे।

वो दोस्त, वो खेल और वो पुरानी गली,
आज भी याद आए तो आंखों में खुशी खिली।

समय बदल गया और दोस्त दूर हो गए,
बचपन के वो साथी यादों में मशहूर हो गए।

बचपन के दोस्तों की बात ही निराली थी,
उनके साथ हर शाम खुशियों वाली थी।

नटखट बचपन शायरी

वो शरारतें और वो नटखट अंदाज,
बचपन में हर दिन था खुशियों का राज।

कभी खिलौना तोड़ना, कभी रूठ जाना,
नटखट बचपन का था यही फसाना।

घरवालों से छुपकर बाहर खेलने जाना,
बचपन में हर रोज था नया बहाना।

कभी दोस्त को छेड़ना, कभी खुद रूठना,
नटखट बचपन में कितना प्यारा था झगड़ना।

शरारतों से घर में रौनक रहती थी,
बचपन की हंसी हर दिल में बसती थी।

वो चोरी-छिपे मिठाई खाना याद आता है,
नटखट बचपन आज भी बहुत सताता है।

कभी पेड़ पर चढ़ना, कभी पतंग उड़ाना,
बचपन में हर काम था दिल को भाना।

डांट पड़ती थी फिर भी शरारत करते थे,
बचपन में हम अपनी ही दुनिया में रहते थे।

वो नटखट बातें और प्यारी सी हंसी,
बचपन की यादों में आज भी है बसी।

हर दिन नई शरारत, हर पल नई बात,
नटखट बचपन था खुशियों की सौगात।

गलियों में मस्ती और आंखों में चमक थी,
नटखट बचपन की अपनी ही अलग झलक थी।

आज समझ आता है वो दिन कितने खास थे,
जब हमारी शरारतों के भी अपने एहसास थे।

निष्कर्ष

बचपन की पुरानी यादें जिंदगी की उन खूबसूरत यादों में शामिल हैं, जिन्हें समय कभी मिटा नहीं सकता। बचपन की मासूमियत, दोस्तों के साथ बिताए पल, छोटी-छोटी शरारतें और बिना किसी चिंता के हंसना आज भी दिल को सुकून देता है। भले ही हम अपने बचपन में वापस न जा सकें, लेकिन उसकी यादों को हमेशा अपने दिल में संजोकर रख सकते हैं।

उम्मीद है कि बचपन की पुरानी यादें शायरी का यह संग्रह आपको अपने बचपन के उन प्यारे दिनों की याद जरूर दिलाएगा। अगर आपको ये शायरियां पसंद आई हों, तो इन्हें अपने पुराने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर साझा करें।

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